*~ आध्यात्मिक भ्रम ~*


*एक बाद याद रखो , मौन के अलावा, बाकी हर चीज तुम्हारी कल्पना मात्र है--वह कितनी ही सुंदर क्यों न हो।*
*मैं इतना ही कह सकता हूं कि मेरा* *समर्थन केवल तुम्हारे मौन को है।*
*क्योंकि केवल तुम्हारे मौन में ही तुम* *अपने जीवन केंद्र के करीब होते हो। परम मौन में, तुम स्वयं ही केंद्र हो जाते हो।*
*लेकिन याद रखो-- किसी भी तरह की कल्पनाओं से बचो-- सभी कल्पनाओं से--यहां तक कि* *दिव्यता का आभास देती हुई सुन्दर* *कल्पनाओं से भी।*🌹

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