जिसने भोगा है, वही विरक्त हो सकता है!
बुद्ध पैदा हुए तब देश सोने की चिडिया था। चौबीस तीर्थंकर जैन सम्राटों के बेटे थे। राम, कृष्ण और बुद्ध भी! इस देश में जो भी महाप्रतिभाऐ पैदा हुई, वे राजमहलो से आयी थी। अकारण नहीं! आकस्मिक ही नही! जिसने भोगा है, वही विरक्त होता है! वही छोड पाता है, जिसने भोगा है! जिसने जिया है! जिसने जाना है! जिसके पास धन ही नही है, उससे तुम कहो धन छोड दो, वह क्या खाक छोडेगा? जिसने संसार का अनुभव ही नही किया है, उसे कहो संसार छोड दो! कैसे छोडेगा?
देश और समाज बहोत गरीब है! सारा जीवन, सारी उर्जा रोजी-रोटी जुटाने में ही समाप्त हो जाती है। गरीब आदमी कब वीणा या बांसुरी बजाये? दीन-हीन रोटी ही नहीं जुटा पाता! तो अध्यात्म की उडान कैसे भरे? अध्यात्म तो परम विलास है, वह तो आखिरी भोग है! आंतरिक और अनन्त का भोग !!
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